भारत में कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए PF (भविष्य निधि) एक महत्वपूर्ण सुविधा है, जिसे प्राप्त कर कर्मचारी अपनी आम जरूरतों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। हाल ही में EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) द्वारा इसके लिए एक जरूरी कदम उठाया है, जिससे कर्मचारियों को आसानी से लाभ प्राप्त हो सकता है। इस पहल से PF से जुड़ी पुरानी गलती ठीक की जा सकती है।

EPFO ने बनाया नया नियम
EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) द्वारा हाल ही में कंपनियों/नियोक्ताओं के लिए एक खास पहल की शुरुआत की है, इस पहल के माध्यम से कंपनियों को 6 महीने का समय दिया जा रहा है, जिसमें वे उन सभी कर्मचारियों को PF (Provident Fund) में जोड़ सकती है जिन्हें पहले नहीं जोड़ा गया हो। इस प्रकार अब कंपनियों को ज्यादा कर्मचारियों को पीएफ की सुविधा प्रदान करनी होगी, साथ ही उनके द्वारा जो गलती की गई हो, उसे उन्हें सुधारना होगा।
EPFO द्वारा कंपनियों एवं नियोक्ताओं को कर्मचारियों के PF से जोड़ने के लिए 6 महीने की खास कंप्लायंस विंडो प्रदान करने की घोषणा की है। ऐसे में उन सभी कर्मचारियों को भी पीएफ का लाभ प्राप्त होगा, जिन्हें अब तक यह लाभ नहीं मिल रहा था। इस प्रकार अब 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 तक के बीच जिन कर्मचारियों को पीएफ नहीं मिला है, उन्हें जोड़ा जाएगा।
EPFO की नई पहल से होगा लाभ
EPFO द्वारा शुरू की गई इस पहल का नाम EES (एंप्लाइज एनरोलमेंट स्कीम) 2025 रखा गया है। इस पहल को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को PF की सुविधा का लाभ प्रदान करना है। इस पहल के माध्यम से नीचे दिए गए कर्मचारियों को लाभ मिलेगा:-
- वे कर्मचारी जिन्हें PF की सुविधा में नहीं जोड़ा गया है।
- वे कर्मचारी जो पात्र होने के बाद भी EPFO के रिकॉर्ड में नहीं हैं।
- वे कर्मचारी जिनकी सैलरी EPF की सीमा में आता है।
- उन सभी कर्मचारियों को इस पहल का लाभ मिलेगा जिनकी नियुक्ति 1 जुलाई 2017 से 31 जुलाई 2025 के बीच हुई है।
वे सभी नियोक्ता/कंपनी जो अभी तक EPF कानून में रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें भी इस पहल के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन करना चाहिए, जिससे वे अपने कर्मचारियों को PF की सुविधा प्रदान कर सकते हैं।
EPFO ने कंपनियों को दिए आदेश
यदि कोई कंपनी/नियोक्ता पीएफ की सुविधा से पात्र कर्मचारियों को वंचित रखते हैं तो ऐसे में EPFO द्वारा उनके लिए विशेष प्रावधान बनाए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:-
- कंपनियां बिना किसी फाइन के कर्मचारियों को पीएफ में जोड़ सकती हैं।
- कर्मचारियों का बकाया अंशदान जमा कर रिकॉर्ड को कंपनी नियमित कर सकती है। कंपनी को केवल नियोक्ता वाला भाग जमा करना होगा। इसमें उन्हें धारा 7Q के अंतर्गत ब्याज, प्रशासनिक शुल्क एवं 100 रुपये का जुर्माना भी जमा करना होगा।
- कंपनी द्वारा हुई पहले की चूकों में वे सुधार सकती है। यदि कंपनी द्वारा निर्धारित 6 महीने की अवधि में यह कार्य नहीं किए गए तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
- वे सभी कंपनियां जिन पर जांच चल रही हों वे पीएम विकसित भारत स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।
EPFO की नियोक्ताओं से अपील
ईपीएफो द्वारा नियोक्ताओं से अपील की गई है कि वे सभी इस अवसर का लाभ एक बार जरूर उठाएं, जिससे वे भी सबके लिए सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य में अपना सहयोग कर सकते हैं। EPFO द्वारा SMS एव, ईमेल के माध्यम से नियोक्ताओं को जानकारी प्रदान की जाएगी, ऐसे में कंपनियां नियमों को जानकारी प्राप्त कर सकती है। साथ ही इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से होगा रजिस्ट्रेशन
ईपीएफओ के द्वारा बीते कुछ सालों में अपनी सेवाओं का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे कर्मचारियों को आसानी होती है, इसके लिए UAN (Universal Account Number) की आवश्यकता होती है, जिसके द्वारा कर्मचारी अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन माध्यम से देख सकते हैं।
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EPFO New Scheme FAQs
ईपीएफओ के नए 6 महीने वाली पहल में क्या है?
इस नई पहल के माध्यम से कंपनियों को 6 महीने का समय दिया गया है, जिससे वे उन सभी पात्र कर्मचारियों को पीएफ की सुविधा का लाभ दे सकते हैं जिन्हें किसी कारण से इस सुविधा में नहीं जोड़ा गया है।
EPFO के नए नियम से किसे लाभ मिलेगा?
इस नए नियम से उन सभी कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जो EPF के पात्र हैं, लेकिन 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच इन्हें पीएफ में शामिल नहीं किया गया है।
क्या कंपनियों पर EPFO द्वारा किसी प्रकार का जुर्माना लगाया जाएगा?
यदि कंपनियों द्वारा 6 महीने की अवधि में पात्र कर्मचारियों को पीएफ में जोड़ने का कार्य नहीं किया गया तो उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकई है।
ईपीएफओ की नई पहल से कर्मचारियों को क्या लाभ मिलेगा?
इस नई पहल के माध्यम से कर्मचारियों को पीएफ जमा, ब्याज, EPS पेंशन एवं EDLI बीमा का लाभ मिलेगा। इस से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी।









